मानपुर /उमरिया। मानपुर तहसील के कृषकों को अपनी बोई हुई फसल का बीमा करवाने के लिए संबंधित बैंक इधर से उधर घुमा रहे हैं और दिनांक 15/01/2018 जो कि निर्धारित फसल बीमा की अंतिम तिथि है तब भी यह हाल है कि किसानों को स्टेट बैंक जैसे अग्रणी बैंक उक्त बीमा के लिए इधर से उधर भटका रहे हैं और बेचारा किसान किंकर्तव्यविमूढ है। जब इसकी जानकारी हमारे प्रतिनिधि को लगी तो वे स्वयं अपना खुद का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का फार्म लेकर सच जानने भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा मानपुर में पहुँचे और वहाँ पर मुख्य प्रबंधक अरुण कुमार पटेल से मिले तो उन्होने ब्रांच के सामने स्थित कियोस्क में जाकर फार्म जमा करने कहा,इस पर हमारे प्रतिनिधि ने पूछा कि क्या उक्त बीमा आपके ब्रांच में नहीं हो पाएगा तो मैनेजर साहब ने कहा कि वह हमारा कियोस्क है हमने उन्हें ऐसे कार्यों के लिए ही अप्वाईन्ट किया है आप जाओ और जाकर बीमा कराओ कोई दिक्कत हो तो मुझे बताना और जब हमारे प्रतिनिधि उक्त कियोस्क पहुँचे तो वहाँ के संचालक ने बीमा का फार्म लेने से साफ मना कर दिया और बोले की आप दुर्गा कम्प्यूटर चले जाओ या कहीं और से करा लो हम नहीं कर सकते इस पर वापस जाकर जब ब्रांच मैनेजर श्री पटेल को बताया तो वो बोले हमारे फील्ड आफिसर से बात करो वही बता पाऐंगे जब संबंधित फील्ड आफिसर से बात की गई तो उन्होने वही राग अलापा की हमारे कियोस्क जाओ। इस पर व्यथित होकर जिला कलेक्टर महोदय को जब फोन लगाया गया तो उनसे संपर्क नहीं हो सका तब मानपुर तहसीलदार को फोन पर समूचे घटनाक्रम की सूचना दी गई जिस पर तहसीलदार महोदय ने एसबीआई प्रबधक से बात कराने को कहा जब मैनेजर साहब के पास जाकर उनसे इस बावत बताया तो उन्होने तहसीलदार से बात करने से साफ ईन्कार कर दिया और अपनी कुर्सी से उठकर बैंक वाहन में बैठकर कहीं चले गए।इस दौरान तहसीलदार मानपुर ने हल्का पटवारी मानपुर और एस ए डीओ महोदय को जब बैंक भेजा तब कहीं जाकर उनकी पहल पर फील्ड आफिसर ने किसानों से संबंधित फार्म दो-चार किसानों से लेकर जमा कर खानापूरी कर महज औपचारिकता निभा दी। इसके बावजूद भी किसान मित्र बोधराम चौधरी तथा नन्दकीशोर एवं दूरदराज से आए हुए लगभग एक सैकड़ा कृषक पूरा दिन भटकते रहे और अंत में किसान मित्रों को फार्म सौपकर बैरंग वापस लौटने पर मजबूर हो गए।अब यह देखना होगा की उन किसानों के फसल बीमा के फार्म बैंक द्वारा ले लिए गए अथवा नहीं।आज जबकि समूचा मानपुर क्षेत्र सूखे की चपेट में है और जिले का किसान बहाली से बेबस और लाचार होकर मौत को गले लगाने हेतु विवश है ऐसे स्थिति में स्टेट बैंक जैसे अग्रणी बैंक जो कि अपने आप को सर्वोच्च ग्राहक सेवा की मिशाल बताते हैं उनके अधिकारी कर्मचारियों का अन्नदाता किसानों के साथ ऐसा सूखा रुख और असहयोगात्मक रवैया क्या और क्यूँ है इसका जवाब शायद जिम्मेदार ही दे पाऐंगे किंतु किसी भी सूरत में ऐसा कृत्य निंदनीय है। और यह व्यवस्था हर दशा में बदली जानी चाहिए ताकि बेबस किसान अपना काम धंधा छोड़ ऐसे बैंक अधिकारियों के चक्कर काटकर पुनः कोई अवांछित कदम उठाने पर मजबूर न हो, अब यह देखना होगा।
मानपुर /उमरिया नहीं हो रहा फसल बीमा/चक्कर कटवा रहे बैंक। बैंक अधिकारियों की तानाशाही बनी-किसानों के लिए परेशानी का सबब