सतीश यादव राजगढ़ जीवन में नया सीखने और उसे पूरा करने की ललक रखने वाला व्यक्ति कभी पीछे मुड़कर नहीं देखता है। यह कर दिखाया है राजगढ़ जिले के सुठालिया कस्बे के कैलाष नारायण मेहर ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का लाभ लेकर। गरीबी के कारण पारिवारिक समस्याओं ने उसे 8 वीं के बाद पढ़ने नहीं दिया। मजदूरी कर बूढे़ माता-पिता की सेवा के साथ अपने दो बच्चे पालना उसके लिए बहुत बड़ी चुनौती थी। ऐसे में नगर परिषद सुठालिया से उसे मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की जानकारी मिली तो श्री मेहर ने फैसला किया कि अब वह मजदूरी नही करेगा। और उसने स्वरोजागर के लिये बैंक में ऋण के लिये आवेदन कर दिया। बैंक से स्वीकृत ऋण उसे मिलता उसके पूर्व योजानान्तर्गत नगर परिषद सुठालिया द्वारा स्वयं का रोजगार स्थापित करने और व्यवसाय के लिए आवष्यक प्रबंधन की मूलभूत और महत्वपूर्ण जानकारियों के लिये 6 दिवसीय प्रषिक्षण के लिये स्टार स्वरोजगार प्रषिक्षण संस्थान राजगढ़ भेजा गया। यहां उसे क्या करें-क्या न करें के बीच दृढ़ संकल्प होकर लक्ष्य को पाने की प्रेरणा मिली। प्रषिक्षण में उसके मन में आस-पास की मांग और उपलब्धता के मद्येनजर व्यवसाय प्रारंभ करने की सीख ने स्वयं का ई-रिक्षा रखने और व्यवसाय प्रारंभ करने की बात घर कर गई। जिससे उसे एक नई दिषा मिली और कुछ कर गुजरने की ईच्छा षक्ति ने उसे जीवन की नई राह दिखाई। इसके पीछे मेहर की सोच थी कि उसके कस्बे में आॅटो नहीं है। बस स्टैंड से ज्यादातर लोगो को पैदल ही घर जाना पड़ता है इसका उसे अच्छा लाभ मिल सकता है। ऐसे मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना ने व्यवसाय की राह आसान कर दी। श्री मेहर की सोच, मेहनत और उसका सार्थक प्रयास आज रंग लाया है। परिश्रमी और लगनषील होने के साथ ही उसकी व्यवहार कुषलता से उसके ई-रिक्षा को सुठालिया में अलग पहचान मिली। दिन हो या रात लोग उसे मोबाईल करते है और वह सवारी लेने पहुँच जाता है। इसके साथ ही एक बार ई-रिक्षा की बेटरी फुल चार्ज होने पर लगभग 60 कि.मी. का सफर तय करने के कारण वह प्रतिदिन आस-पास के 6-7 ग्रामों तक की सवारियां लाने-ले जाने के साथ-साथ मंगलवार एवं षुक्रवार को आंगनवाड़ी केन्द्रो तक टीकाकरण की वेक्सीन पहंुचाने का भी काम कर लेता है। इससे वह आराम से 250-300 रूपये की दिन भर में शुद्ध बचत कर लेता है। पहले श्री मेहर मजदूरी करने पर 3000-3500 रूपये महीना ही कमा पाता था। आज वह 7000-9000 रूपये महिना कमा रहा है। जिससे उसके परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरी है। अब वह अपने बेटे को प्रायवेट स्कूल में पढ़ा रहा है ताकि उसका बेटा बड़ा होकर सम्मान पूर्वक जिये और अपने भविष्य को नई उंचाई पर ले जा सके। श्री मेहर एवं उनका परिवार बहुत प्रसन्न एवं खुषहाल है। उसके ई-रिक्षा में यात्रा करने वाले ग्रामीण भी उत्सुक रहते है। ऐसे ग्रामीण युवा जो कुछ करने की ईच्छा रखते है, को पाने की प्रेरणा का स्त्रोत भी बना हुआ है श्री मेहर। उसके इस जुनून को मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना ने नई दिशा दी और जीने की राह आसान कर मजदूर से मालिक बना दिया
राजगढ़ सफलता की कहानी मुख्य मंत्री युवा स्व रोजगार योजना से मजदूर से मालिक बना सुठालिया का मेहर