थावरी/ऊंटकला- कमजोर वर्गों और गरीबों के हित में काम करने के सरकार के तमाम दावों की पोल खोलता एक मामला सामने आया है, जहाँ एक ७० साल की वृद्धा आज भी अच्छे दिनों की आस में पिछले ४ वर्षों से पेंशन और राशन के एक-एक दाने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है l यह दुखद और झकझोर देने वाली व्यथा पूनाबाई गौड़ पति स्व. नन्हेवीर गौड़ निवासी ग्राम ऊंटकला, पंचायत थावरी की है l यह महिला बेसहारा है और इनके पति की ४ वर्ष पूर्व म्रत्यु हो चुकी है l
जानकारी के अनुसार महिला के पास बीपीएल कार्ड भी है, परन्तु इन्हें आज तक राशन का एक दाना भी नहीं मिला है l महिला को वृद्धावस्था पेंशन भी नहीं मिल रही है l इस बाबत पूनाबाई ने ग्राम सरपंच को सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ एक लिखित आवेदन भी दिया है l
सरकारें सभी वर्गों के लिए योजनायें बनाने का दावा कर रही है और कागजी आंकड़ों में रिकार्ड भी बनाये जा रहे हैं और योजनाओं की सफलता का जश्न भी मनाया जा रहा है l परन्तु समाज में पूनाबाई जैसे बहुत से लोग हैं जिनको किसी भी योजना का कोई लाभ नहीं मिल पाता है l
यह एक बहुत बड़ी बिडम्बना ही है कि पूनाबाई जैसे उन तमाम कमजोर एवं जरूरतमंद भारतीय नागरिकों को, अब अपने दस्तावेजों के माध्यम से यह साबित करना पड़ रहा है कि हम जरूरतमंद हैं और इसके बावजूद भी जिम्मेदार धृतराष्ट्र की तरह अंधत्व को प्राप्त हो गए हैं l सरकारों को चाहिए कि केवल योजना बनाने मात्र से कुछ नहीं होगा l इन योजनाओं को जरूरतमंदों तक पहुँचाना होगा अन्यथा सबका साथ सबका विकास का नारा केवल एक जुमला बनकर रह जायेगा l