बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ का दिनरात जाप करने वाली सरकार की पोल खोलती एक खबर आ रही है, जहाँ सरकारी उलटफेर के चलते एक छात्रा का शैक्षणिक भविष्य अन्धकार में है l नर्सिंग की पढाई के लिए यह छात्रा ३ वर्षों से एक विश्वविधालय से दुसरे विश्वविधालय भटक रही है, पर उसकी समस्या सुनने वाला कोई नहीं है l माजरा यह है कि सरगुजा की छात्रा खुश्मारेंन खाखा ने नर्सिंग की पढाई गुरु घासीदास विश्वविधालय से प्रारंभ की थी पर उसी समय सरगुजा विश्वविधालय की स्थापना हो गई और छात्रा के दस्तावेज सरगुजा विश्वविधालय भेज दिए गए l लेकिन इसके पहले की छात्रा की समस्या का हल हो पाता, एक और सरकारी फरमान ने छात्रा की मुसीबत और बढ़ा दी l फरमान के अनुसार नर्सिंग की परीक्षा सरगुजा विश्वविधालय में न होकर आयुष विश्वविधालय में होना है l
अब छात्रा इन तीनों विश्वविधालय के भंवरजाल में फंसी है और परीक्षा देने के लिए ३ वर्षों से चक्कर काट रही है l छात्रा का कहना है कि अगर समय पर परीक्षा हो गई होती तो वह आज कहीं नौकरी कर रही होती l आज एक बेटी पढने के लिए दर दर की ठोकरें खा रही है और सरकार के जिम्मेदार लोग अपनी ढपली अपना राग गाने में लगे हुए हैं l सरकारी आंकड़ों में शिक्षा की गुणवत्ता में इजाफा बताया जा रहा है पर वास्तविकता कुछ और ही है, जिस पर यह मामला प्रकाश डाल रहा है l