होशंगाबाद - एक और तो सरकार यह बड़े-बड़े दावे एवं वादे कर रही कि सरकार की योजनाओं से गरीबों और आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों का कल्याण हो रहा है l परन्तु योजनाओं को सिर्फ लागू कर देने भर से कुछ नहीं होगा उसकी परस्पर मानीटरिंग होना भी जरूरी है l ऐसा ही एक मामला मुख्यमंत्री आवास योजना में गड़बड़ी का सामने आया है जहाँ शासन की इस योजना को बैंक अधिकारी ही बट्टा लगा रहे हैं l मामला यह है कि एक विकलांग हितग्राही तुलसीराम पिता गेंदालाल निवासी ग्राम मेहरा घाट की राशि बैंक खाते में जमा हो चुकी है, परन्तु  योजना की राशि हितग्राही को नहीं दी जा रही है l प्राप्त जानकारी के अनुसार आवास योजना  वर्ष 2015 की बताई जा रही है l आवास योजना का ऋण मकान बनाने के लिए क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक निमसाड़िया से 48000 की पहली किस्त वर्ष 2016 में जारी की गई थी l इसके बाद शाखा प्रबंधक पंडित जी के द्वारा विकलांग हितग्राही से विगत 2 वर्षों से बैंक के चक्कर लगवाए जा रहे हैं l चक्कर काट रहे विकलांग हितग्राही ने मीडिया के सामने जानकारी देते हुए बताया कि एक किस्त बैंक के द्वारा दी जा चुकी है, लेकिन हितग्राही जब दूसरी किस्त लेने बैंक पहुंचा तो बैंक के मैनेजर द्वारा बैंक पासबुक एवं अन्य दस्तावेज हितग्राही से लेकर अपने पास रख लिए हैं l सवाल यह है हितग्राही की पासबुक बैंक में क्यों रख ली गई है? आखिर इसके पीछे क्या वजह हो सकती है ? सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ऐसे कई हितग्राही हैं, जो निरंतर बैंक के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें उनके खाते की राशि और योजना का लाभ देने की बजाय मूलभूत सुविधा से वंचित किया जा रहा है l