उमरिया | बांधवगढ़ वन एवं वन्यप्राणी के संरक्षण सम्बर्धन हेतु सतत प्रयासरत बीटीएफ की प्रबंधन्यासी एवम लाईफ लाइन इंडिया की डायरेक्टर वंदना द्विवेदी (एडवोकेट) ने लगातार हो रहे बाघों की मौत पर व्यथित होकर अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे बाघों के संरक्षण सम्बर्धन के सामने पुनः प्रश्नचिन्ह लग गया है। लगातार घुनघुटी, कल्याणपुर, बंघवगढ़ में बाघ का मृत पाया जाना बाघों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान है। उन्होंने कहा कि कही न कही शासन भी जिम्मेदार है, क्यों ऐसे कर्मचारियों की पोस्टिंग बाघो के क्षेत्र में लगाई जाती है, जो केवल फार्मेल्टी करते है। ऐसे में ही दुराव छिपाव की राजनीती के चलते ही हमारा बाघ मौत के मुह में समां रहा है| शासन अपनी गलती छिपाने की नीयत से हो रहे मामले को रफा दफा करने की ताक में रहते है| इसी का सीधा फायदा शिकारी गिरोह उठा रहे है. विदित है कि हो रहे इलेक्ट्रिक लाइन से बाघों के शिकार को लेकर वन से गुजरने वाली इलेक्ट्रिक लाइन को फाइबर कोटेड करने का प्रपोजल शासन को भेजा गया है| लेकिन अभी तक इस पर ध्यान नही दिया गया, परिणाम स्वरुप निरंतर बाघों का शिकार इलेक्ट्रिक लाइन के खुले होने कि वजफ से आये दिन हो रहे है| एक तरफ जहा कुछ अच्छे अधिकारियों कि वजह से बीटीआर में बाघों की संख्या में इजाफा हुआ है. वही दूसरी ओर वनकर्मियो कि लापरवाही के चलते बाघ मौत के काल में समां रहे है| शासन को इस दिशा में ठोस कदम उठाना होगा, जिससे स्थिति सामान्य हो सके|