रेहटी  - वैसे तो रेहटी  मे राजनीति करने और मुख्यमंत्री से अपने अच्छे संबंध रखने के लिए आप को जितने नेता रेहटी में मिलेंगे उससे ज्यादा शायद ही कहीं  मिले मगर यह है रेहटी की बदकिस्मती कहें या इन नेताओं की बदकिस्मती कहें कि आज तक किसी नेता ने  नगर को एक शव वाहन तक उपलब्ध नहीं करवा पाए क्योंकि  रेहटी के आसपास का क्षेत्र बहुत ही बड़ा है यहां प्रसिद्ध तीर्थ स्थल सलकनपुर के साथ-साथ आंवली घाट रेहटी  तहसील के अंदर ही आता है l नवरात्रि एवं सोमवती अमावस्या के ऐसे मौके आते हैं जब रेहटी में शव वाहन की जरूरत ऐसी महसूस होती है कि हर व्यक्ति यह महसूस करता है कि रेहटी  तहसील में एक शव वाहान  होना ही चाहिए मगर यह महसूस ही कर सकता है कुछ कर नहीं सकता क्योंकि यह काम हमारे चुने हुए नेता ही कर सकते हैं मगर वह कुछ कर नहीं कर पा रहा है इसका उदाहरण यह है कि राजनीति करने वाले नेताओं को थोड़ी मानवता के नाते कुछ कार्य  करना चाहिए जिससे आम जनता जो की  पूरी तरह परेशान हो चुकी है ,उसे कुछ राहत मिले |

 रेहटी  में घटित रात को हादसे में हर व्यक्ति की आंख में आंसू थे 

आम जनजीवन में होने वाले कुछ कार्य ऐसे होते हैं कि कभी-कभी हर व्यक्ति की आंखों में आंसू होता है और बस यही कहता है कि यह क्या हो रहा है कोई कुछ करता  क्यों नहीं आखिर मैं कुछ कह भी नहीं सकता क्योंकि जो करना होता है वह शासन के हाथ में होता है और शासन के जो  नेता बैठे हैं वह कुछ कर नहीं रहे हैं इसका उदाहरण रात को देखने को मिला रेहटी में रात को एक एक्सीडेंट घटित हुआ जिसमें एक बालक की मौके पर ही मौत हो गई  तब मौके पर पहुंचे रेहटी थाना प्रभारी रजनीकांत दुबे के द्वारा देखा गया कोई वाहन उपलब्ध नहीं हो पाया एवं उन्होंने तत्काल अपने ही वाहन से उक्त बालक को शासकीय अस्पताल पहुंचाया  एवं अस्पताल में मृत बॉडी को रखने की कोई व्यवस्था नहीं थी तब जाकर उनके गांव से एक ट्रैक्टर-ट्राली को बुलाया गया जिसमें मृत शरीर को रात भर रखा गया  एवं परिवार वाले रात भर उस शरीर के आसपास इस सर्दी में बैठे रहे यह विडंबना ही कह सकते हैं कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के क्षेत्र में ना तो एक शव वाहन है और ना ही मार चूरी  रूम है क्योंकि हमेशा रेहटी  के आसपास बरसात के मौसम में अज्ञात शव मिलते हैं  देलाबाड़ी में भी कई मौके पर या सलकनपुर में भी कई अज्ञात शव मिलते हैं तब इन शवों को पुलिस प्रशासन के सामने रखने की बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है क्योंकि रेहटी में पोस्टमार्टम रूम नहीं है जिससे कि इन शवों को लेकर हमेशा ही यह खतरा बना रहता है कि इन शवों को कोई जानवर नोचकर ना खा जाए।और खुले रूप मै शव का पोस्टमार्टम होता है।