रेहटी - शासन की भावान्तर योजना के भंवर में सभी फसे हुए हैं। किसान परेशान है। व्यापारी मजबूर है। और प्रशासन के प्रयास भी सफल नही हो पा रहे हैं। भावांतर योजना का असर पूरी तरह से रेहटी कृषि उपज मंडी में दिखाई दे रहा है। लगातार कई दिनों से किसान, व्यापारियों के बीच प्रतिदिन विवाद की स्थिति बनने के बाद किसान शनिवार को आक्रोश में आ गए और उन्होने मंंडी में हंगामा करना शुरू कर दिया। किसानों की मांग थी कि जब शासन के मौखिक आदेश के बाद व्यापारी अपनी मनमानी कर रहे हैं। और किसानों की उपज उड़द, मूंग जहां 2200 से 2500 रूपए तक व्यापारियों को लेना चाहिए। लेकिन 1000 रूपए से लेकर यहां 1500 रूपए तक ही उड़द मूंग खरीदी जा रही है। वहीं व्यापारियों का कहना है कि किसानों का माल हल्का होने से हमे यह रेट लगाना पड़ रहा है। और अच्छी उड़द और मूंग के भाव 2400 रूपए तक मंडी में खरीदे गए हैं। जबकि जिला कलेक्टर के निर्देश में कम से कम 1800 रूपए तो उड़द और मूंग के दाम मिलना चाहिए। लेकिन शनिवार को यह दाम भी किसानो को नही मिल सके। जहां किसानों के हंगामो के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने कृषि उपज मंडी के गेट पर ताला डाल दिया। ताकी किसानो का उग्र रूप नही देखना पड़े। इसके बाद तहसीलदार राजेंद्र जैन, टीआई रजनीकांत दुवे, मंडी अध्यक्ष तुलसीराम रिठोरिया, और मंडी स्टाफ के बीच किसानों से चर्चा हुई। जहां किसान १८०० से कम में उपज बेचने को तैयार नही थे। वहीं व्यापारियों का कहना है कि अच्छी उपज के अच्छे दाम और खराब उपज के कम दाम की ही बोली लगा सकते है। किसान को अगर फसल नही देना है तो वह कैंसिल कराकर नसरूल्लागंज और इटारसी बेच सकते हैं । शनिवार को किसानों और व्यापारियों के बीच बड़ते विवाद में निलामी भी शुरू नही हो सकी। और प्रशासन ने किसानों से चर्चा कर और व्यापारियों से बैठक लेकर किसी तरह उपज की निलामी शुरू करवाई। जहां किसानों को शासन के मौखिक आदेश 1800 से कम उड़द मूंग नही ली जाए। उसका भी दाम किसानों को नही मिल सके। 1699 तक किसानों की उड़द बिकने के बाद इसी से किसानों को संतोष करना पड़ा। दोपहर में निलामी जब शुरू हो रही थी। तब जैसे ही बोली लगी और किसानों ने हंगामा शुरू कर दिया कि हम 1800 से कम मूग, उडद नही देंंगे। जहां निलामी को निरस्त करना पड़ा। और सारे किसान एकजुट होकर चक्काजाम करने का निर्णय लिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने किसानों का आक्रोश देखते हुए मंडी गेट में ताला डाल दिया। ताकी कोई उग्र रूप किसानों का नही देखना पडे। इसके बाद प्रशासन की समझाईस के बाद भी बोली शुरू हुई। जिससे किसान संतुष्ट नजर नही आए।
प्रशासन ने दी समझाईस
प्रशासन की ओर से तहसीलदार राजेंद्र जैन ने कृषि उपज मंडी को निर्देशित किया कि जो किसान यहां की निलामी से संतुष्ट नही है वह किसान अपनी उपज को कैंसिल कराकर वह नसरूल्लागंज या इटारसी बेच सकता है। और नियमानुसार १५ किमी से अधिक दूरी पर किसान उपज ले जाता है तो उसका कृषि उपज मंडी को देना होगा। जिसकी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। वहीं तहसीलदार राजेद्र जैन ने किसानों से अपील की है कि किसान अपनी फसल मंडी में लाने से पहले अच्छी तरह से साफ कर के लाए ताकी व्यापारियों को कम भाव में लेने का बहाना नही मिल सके। वहीं व्यापारियों से कहा कि सभी व्यापारी अपनी दुकानों पर नसरूल्लागंज इटारसी में उस दिन उपज के जो भाव चल रहे हैं वह बोर्ड पर लगाए जाए ताकी किसान निर्णय ले सके कि मुझे उपज कहां बेचना है।
20 किमी की दूरी पर ही 1000 का अंतर
किसान हरीश बारेला मथार का कहना है कि जो उपज रेहटी कृषि उपज मंडी में खरीदी जा रही है कि वही उपज उसी दिन पास की मंडी नसरूल्लागंज में बेची जाती है तो दोनो के भाव में 1000 से अधिक का अंतर आता है। यहां व्यापारी कम होने से वह पूरी तरह से अपनी मनमानी कर रहे हैं। किसान राधेलाल यादव सेमरी ने बताया कि इस मंडी में तो किसानों को पूरी तरह से लूटा जा रहा है जो फसल ३ हजार रूपए तक बिकनी चाहिए। उसे मात्र यहां १५०० रू तक ही लिया जा रहा है। यह मंडी बंद हो जाए तो किसानो के हित में है। धरम सिंह मकोडिय़ा, जगदीश चंद्रवंशी का कहना है कि इस मंडी का कभी भी सुधार नही हो सकता है। सही यही है कि यह मंडी बंद हो जाए। और किसानों को दूसरी मंडी पहुंचकर अपनी उपज के सही दाम मिल सके।
कम व्यापारी की बजह से नही है यहां भाव
कृषि उपज मंडी में 11 लाईसेंसी व्यापारी है जिनमें से 5-6 व्यापारी खरीदी करते हैं। ऐसे में किसानोंं को उनकी उपज का सही दाम नही मिल पाता है। और अन्य स्थानों पर व्यापारियों की संख्या अधिक होने से यहा प्रतिस्पर्धा ज्यादा होने से किसानों को उनकी उपज के अच्छे दाम मिल जाते हैं। वहीं व्यापारियों का कहना है कि जिस उपज को हम खरीदते हैं हमें 50 रूपए प्रति क्विंटल मुनाफा मिलना चाहिए। अगर वह नही मिलेगा तो हम किसानों की उपज लेने में असमर्थ रहेंगे।
क्या कहना है मंडी अध्यक्ष का
मंडी अध्यक्ष तुलसीराम रिठोरिया का कहना है कि जिला कलेक्टर के मौखिक आदेश है कि किसानों की उपज उडद और मूंग 1800 से 2200 तक दाम मिले। ऐसा प्रयास करना चाहिए। इसके लिए मंडी प्रबंधन प्रयास कर रहा है। और यहां व्यापारी बड़ाने के भी प्रयास तेज कर दिए हैं।
व्यापारियों और किसानों को समझाईस दी गई है कि किसानों की उपज का उचित दाम मिले। इसके लिए प्रशासन प्रयास कर रहा है। और निलामी के समय स्वयं उपस्थित होकर किसान और व्यापारियों के बीच में चल रहे मतभेद को हटाकर निलामी कराई जा रही है। वहीं मंडी प्रबंधन को भी किसनों के हित में काम करने के लिए कहा गया है।