प्रधानमन्त्री और मुख्यमंत्री का भ्रष्टाचार विरोधी भाषण ले डूबा कइयों की नौंकरी। कर्मचारी राज्य बीमा निगम भारत सरकार और दिल्ली सरकार के कई संस्थानों में बतौर सुरक्षा प्रहरी नौंकरी करने वाले पूर्व सैनिकों ने मोदी जी और केजरीवाल साब के भ्रष्टाचार विरोधी भाषणों से प्रेरित होकर अपने ठेकेदारों और अफसरों के भ्रष्टाचार की पोल खोल दी और दो अफसरों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़वा दिया।
सैनिकों को भरोसा था कि ईमानदार मुख्यमंत्री और प्रधानमन्त्री इस के बदले उन्हें सम्मान देंगे किन्तु उल्टा हो गया।। घूसखोरों को रंगे हाथ पकड़वाने वाले सैनिकों को कर्मचारी राज्य बीमा निगम और दिल्ली सरकार के संस्थानों ने नौंकरी से निकाल दिया और उनका कमाया हुआ वेतन भी बट्टे खाते में डाल दिया।
इसी तरह बीमा निगम में दशकों से सेवारत 70 ठेका कामगारों ने अपने इंजीनियर को मंथली देने से मना कर दिया तो उन्हें भी नौंकरी से निकाल दिया गया। अब यह 14 पूर्व सैनिक और 70 ठेका कर्मचारी दर दर की ठोकर खा रहे हैं। न मोदी जी सुन रहे हैं न केजरीवाल साब।
घटना 24 जुलाई 2017 राजधानी दिल्ली के बवाना क्षेत्र की है। पूर्व सैनिकों ने अपने दो अफसरों भावनाथ झा और मनोज दुबे को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़वा दिया था।। उसी दिन से पूर्व सैनिकों पर मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा। पहले जहां इन्हें 26 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता था वह अगस्त में केवल 22 हजार कर दिया गया और जब इसकी शिकायत मुख्यमंत्री प्रधानमन्त्री से की गई तो इन्हें नौंकरी से ही निकाल दिया गया। यह 14 तो नौंकरी से निकाले ही गए अब सभी बचे सैनिकों को भी मात्र 19 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जा रहा है। विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार l