राजगढ़ /नरसिंहगढ़ रमेश मालवीय (जायसवाल) आज 27 अक्टूबर को कार्तिक शुल्क सप्तमी को हमारे अराध्य भगवान राज राजेश्वर श्री सहस्रार्जुन जी की जंयती है। अराध्य श्री सहस्रार्जुन जी जंयती पर मेरा समस्त स्वाजतियो से निवेदन है कि- आप सभी घर-घर जंयती को हर्ष उल्लास के साथ मनाये, अपने-अपने घर में प्रतिष्ठानों में *घी के दीपक* अवश्य जलाये, मन्यता है कि- *भगवान विष्णु अंशाअवतार है, माँ लक्ष्मी पुत्र है... भगवान श्री सहस्रार्जुन जी को घी दीपक अर्पण करने से घर में धन की वर्षा होती है व खोया हुआ धन प्राप्त होता है, इसलिए उन्हे धन का देवता भी कहा जाता है, इस दिन दीपदान का भी बड़ा महत्व है,आटे के दीपक घी जलाकर नदी/ तालाबों में सपरिवार दीपदान भी करें... घर में पुजा-अर्चना के पटाखे फोड़े व घर के बाहर ध्वज स्थापना करें, साथ ही अपने परिजनों, इष्ट मित्रों को बधाईयाँ भी दें व मिठाई वितरण करें व गरीबों को दान भी अवश्य करें... साध ही आपके क्षेत्र में स्थित भगवान श्री सहस्रार्जुन जी के मंदिरों में अवश्य जायें जंयती के अवसर पर आपके क्षेत्रों में हो रहें सामाजिक आयोजनों व शोभा यात्राओं में आप सभी सपरिवार अवश्य शामिल हो, समाज का सामुहिक रूप से एक जगह पर एकत्रित होना, सामाजिक जागरूकता, एकता व उन्नति उदाहरण है तो आज से ही 27 अक्टूबर को हम सभी को एक दिन हमारे अराध्य चक्रवर्ती सम्राट राज-राजेश्वर श्री सहस्रार्जुन जी के लिए हो आपके कार्यालय व प्रतिष्ठान की छुट्टीया हों, आप और हम सभी ईमानदारी से 27 तारीख को सामुहिक रूप से समाज के साथ एकजुटता से खड़े होकर भगवान सहस्त्रबाहु अर्जुन की जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाये तथा संपूर्ण परिवार के साथ नदी व सरोवर पर जाकर आटे का दीपक मैं घी डालकर जलाकर परिवार के साथ सरोवर में दीप दान करने से परिवार में सुख समृद्धि आएगी तथा खोया हुआ धन पुनः प्राप्त होगा सहस्त्रबाहु जयंती पर दीपदान के महत्व के बारे में पुराणों में कई स्थानों पर उल्लेख किया गया है